संज्ञा और उसके भेद

संज्ञा और उसके भेद

संज्ञा-और-उसके-भेद
संज्ञा और उसके भेद

  • संज्ञा की परिभाषा




  1. आशा गीत गाती है ।
  2. गंगा भारत की सबसे बड़ी नदी है ।
  3. मेरा देश महान ।
  4. आकाश स्वच्छ है ।
  5. गाँधीजी अहिंसा के पुजारी थे ।
  6. नीम गुणकारी पेड़ है ।
  7. गाय दूध देती है ।
  8. सोना कीमती धातु है ।
  9. एवरेस्ट की चढ़ाई कठिन है ।
  10. सैनिक देश की रक्षा करते हैं ।

उपर्युक्त वाक्यो में रेखांकित शब्द आशा, गंगा, देश, आकाश, गाँधीजी, नीम, गाय, सोना, चढ़ाई, सैनिक आदि किसी खास व्यक्ति, वस्तु, प्राणी, भाव या समूह का निर्देश करते हैं ।

Þ  जिस शब्द से किसी विशेष वस्तु अथवा व्यक्ति के नाम का बोध होता है, उस शब्द को 'संज्ञा' कहते है

Þ  किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, विचार, भाव, जीव आदि को पहचान ने के लिए उसे जो नाम दिया गया है उसे 'संज्ञा' कहते है ।

यहाँ वस्तु शब्द का प्रयोग व्यापक अर्थ में हुआ है, जो केवल प्राणी और पदार्थ का वाचक नहीं बल्कि उसके धर्मो का भी सूचक है । साधारण अर्थ में 'वस्तु' का प्रयोग इस अर्थ में नही होता, अतः 'वस्तु' के अंतर्गत प्राणी, पदार्थ और धर्म आते हैं । इन्ही के आधार पर संज्ञा के भेद किए गए हैं । संज्ञा के भेद इस प्रकार हैं :-

(1) व्यक्तिवाचक संज्ञा :

Þ  जिस शब्द से किसी वस्तु या व्यक्ति का बोध होता है, उसे 'व्यक्तिवाचक संज्ञा' कहते हैं ।

Þ  किसी खास व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या स्थान को सूचित करनेवाली संज्ञा को 'व्यक्तिवाचक संज्ञा' कहते हैं ।

उदाहरण -     

  1. शेरु वफादार कुत्ता है ।
  2. मयंक दौड़ में प्रथम आया ।
  3. भारत लोकशाही देश है ।
  4. हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है ।
  5. गंगा पवित्र नदी है ।
  6. दिल्ही भारत की राजधानी है ।
  7. पंजाबी खाना जग विख्यात है ।
  8. चाँदनी चौक सबको पता है ।
  9. प्लासी का युद्ध अंग्रेज़ो ने जीता था ।
  10. श्रावण मास में शिवजी की पूजा की जाती है ।

           उपर्युक्त उदाहरणो में शेरु, मयंक, भारत, हिन्दी, गंगा, दिल्ही, पंजाबी, चाँदनी चौक, प्लासी का युद्ध, श्रावण मास कहने पर किसी एक खास प्राणी, व्यक्ति, देश, भाषा, नदी, स्थान, चौक, युद्ध और मास का ही बोध होता है ।

I व्यक्तवाचक संज्ञाएँ निम्न लिखित रूपो में प्रयुक्त होती हैं :

  •  व्यक्तिओं के नाम –


महेश, रमेश, सुरेश, सचिन, विद्या, संगीता, पूजा आदि ।

  • देशो के नाम –


भारत, नेपाल, जापान, रुस, चीन, अमरिका, श्रीलंका आदि ।

  •  राज्यों के नाम –


दिल्ही, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि ।

  • शहर के नाम –


अहमदाबाद, मुंबइ, सुरत, बड़ौदा, नासिक, जयपुर, दिल्ही, चेन्नई आदि ।

  •  दिशाओं के नाम –


पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दतक्षिण, ईशान, वायव्य आदि ।

  •  नदियों के नाम –


गंगा, यमुना, कृष्णा, कावेरी, साबरमति, सरस्वति, सिंधु आदि ।

  • पर्वतो के नाम –


हिमालय, एवरेस्ट, गीरनार, कैलास आदि ।

  •  समुद्रो के नाम –


हिन्द महासागर, पेसिफिक महासागर, अरब सागर आदि ।

  • गाँव, सड़क, चौक, बाज़ार के नाम –


बीदड़ा गाँव, गांधी रोड़, आश्रम रोड़, लाल बहादुर चौक, चोर बाज़ार आदि ।

  •  पुस्तको और समाचार पत्रो के नाम –


गबन, गोदान, गीतीका, राम की शक्ति पूजा, कामायनी, यामा आदि ।
संदेश, दिव्यभास्कर, दैनिक जागरण, टइम्स ऑफ इन्डिया आदि ।

  • ऐतिहासिक युद्ध, घटनाओ के नाम –


पहला विश्वयुद्ध, प्लासी का युद्ध, रुस की क्रांति, अक्तुबर क्रांति आदि ।

  •  दिनो और महिनो के नाम –


सोमवार, मंगलवार, कार्तिक, पूस, फागुन आदि ।

  •  त्योहारो और उत्सवो के नाम –

होली, दिपावली, ईद, नाताल, बैसाखी आदि ।



(2) जातिवाचक संज्ञा :

Þ  जिन संज्ञाओ से एक ही प्रकार की वस्तुओ अथवा व्यक्तुओ का बोध हो उन्हें 'जातिवाचक संज्ञा' कहते हैं

Þ  जो संज्ञा किसी वस्तु या प्राणी की जाति का बोध कराती है उन्हे 'जातिवाचक संज्ञा' कहते हैं ।

उदाहरण –

  1. मनुष्य स्वार्थी  है ।
  2. किसान हमारा अन्नदाता है ।
  3. कुत्ता वफादार प्राणी है ।
  4. सैनिक देश की रक्षा करता है ।
  5. पेड़ प्रकृति का रक्षक है ।
  6. नदी हमारी लोकमाता है ।
  7. बहन रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बाँधूती है ।
  8. गाँव में कच्चे घर देखने को मिलते है ।
  9. पुलिस जनता की रक्षा के लिए है ।
  10. मोर नाचते हुए सुंदर लगता है ।
उपर्युक्त उदाहरणो में रेखांकित शब्द मनुष्य, किसान, कुत्ता, सैनिक, पेड़, नदी, बहन, भाई, गाँव, घर, पुलिस, मोर आदि शब्द संपूर्ण जाति का बोध कराते हैं । जैसे कि- 'मनुष्य' कहने से किसी एक मनुष्य का नही बल्कि पुरी मनुष्य जाति का बोध होता है । वैसै ही किसान कहने से सभी किसानो का, कुत्ता कहने से सभी प्रकार के कुत्तो का, सैनिक कहने से सभी सैनिको का बोध होता है ।

ï व्यक्तवाचक संज्ञाएँ निम्न लिखित रूपो में प्रयुक्त होती हैं –

  • सम्बन्धिओ के नाम

भाई, बहन, चाचा, मामा, मामी, माँ, पिताजी, मित्र आदि ।


  • व्यवसायो, पदो और कार्यो के नाम

बनिया, सुनार, लोहार, पुलिस, डॉक्टर, प्रॉफेसर, सरपंच, चोर, डाकु आदि ।

  • पशु और पक्षीयो के नाम

गाय, भैंस, गधा, घोड़ा, कुत्ता, चिड़िया, तोता, मोर, कौआ, कबूतर आदि ।

  • वस्तुओ के नाम

घर, किताब, पंखा, मोटर, मटकी, घड़ी, कलम, फूल, सड़क आदि ।

  • प्राकृतिक तत्वो के नाम

बीजली, वर्षा, बादल, झरना, तुफान, भूकंप, पहाड़, नदी, सागर आदि ।

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा और जातिवाचक संज्ञा को और बारिकी से जानने के लिए हम उनके और उदाहरण देखते है –


ïव्यक्तिवाचक संज्ञा                                ïजातिवाचक संज्ञा

1)    शेरु वफादार कुत्ता है ।                      1) कुत्ता वफादार प्राणी है ।
2)    मयंक दौड़ में प्रथम आया ।                2) छात्र पास होने के लिए मेहनत करता है ।
3)    भारत लोकशाही देश है ।                   3) देश का विकास लोगो के विकास से होता है ।
4)    हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है ।                  4) भाषा विचारो को दर्शाति है ।
5)    गंगा पवित्र नदी है ।                           5) नदी हमारी लोकमाता है ।

इस प्रकार व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी एक खास व्यक्ति, वस्तु, प्राणी या स्थान को सूचित करती है, जबकि जातिवाचक संज्ञा से पूरी जाति का बोध होता है ।



(3) भाववाचक संज्ञा :

Þ  "जिस संज्ञा शब्द से वस्तु के गुण या धर्म, दशा अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते है ।"

Þ  "जो शब्द किसी विचार, भाव, गुण, दोष, स्वभाव आदि को प्रकट करते हैं, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं ।"

उदाहरण

  1. घर की सजावट देखकर मेहमान खुश हो गए ।
  2. बाढ़ का बहाव गाँव की तरफ था ।
  3. पुलिस की मार चोर न सह सका ।
  4. माँ ने गोपाल को प्रेम से खाना खिलाया ।
  5. राम और श्याम की मित्रता पूरे गाँव मे प्रसिध्ध थी ।
  6. बीरबल की चतुराई से शहंशाह अकबर प्रभावित थे ।
  7. खाई की गहराई देखकर विवेक डर गया ।
  8. शिक्षक ने अजय को साबासी दी ।
  9. दोपहर की गर्मी से संजय को लू लग गई ।
  10. राधा की वाणी में मिठास थी ।

उपर्युक्त उदाहरणो में रेखांकित शब्द सजावट, बहाव, मार, प्रेम, मित्रता, चतुराई, गहराई, डर, साबासी, गर्मी, मिठास आदि शब्दो से किसी विचार, भाव, गुण, दोष, स्वभाव आदि का बोध होता है, ऐसे शब्दो को भाववाचक संज्ञा कहते हैं ।
हर पदार्थ में धर्म होता है, जैसे पानी में शीतलता, आग में गर्मी आदि । पदार्थ का यह गुण या धर्म उससे अलग नहीं रह सकता । अगर घोड़ा है तो उसमें बल, वेग और आकार के मूल धर्म अवश्य होंगे, जो एक ही अर्थ को व्यक्त करते हैं ।
व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह भाववाचक संज्ञा से भी किसी एक ही भाव का बोध होता है । इस संज्ञा का अनुभव हमें इन्द्रियों द्वारा होता है और प्रायः इसका बहुवचन नही होता ।

ï भाववाचक संज्ञाओ का निर्माण :

        इस प्रकार की संज्ञाओ का निर्माण जातिवाचक संज्ञा, विशेषण, क्रिया, सर्वनाम और अव्यय में प्रत्यय लगाकर होता है, जैसे –
1)    जातिवाचक संज्ञा से                            भाववाचक संज्ञा
बूढ़ा                                                  बूढ़ापा
लड़का                                              लड़कपन
मित्र                                                  मित्रता
दास                                                  दासत्व
2)    विशेषण से                                         भाववाचक संज्ञा
गर्म                                                   गर्मी
सर्द                                                   सर्दी
कठोर                                               कठोरता
मीठा                                                 मिठास
चतुर                                                 चतुराई
3)    क्रिया से                                             भाववाचक संज्ञा
सजाना                                              सजावट
चढ़ना                                                चढ़ाई
बहना                                                        बहाव
मारना                                               मार
दौड़ना                                               दौड़
4)    सर्वनाम से                                         भाववाचक संज्ञा
अपना                                               अपनापन
मम                                                   ममता
नीज                                                  नीजत्व
5)    अव्यय से                                           भाववाचक संज्ञा
दूर                                                    दूरी
समान                                               समानता
साबास                                              साबासी
निकट                                               निकटता



(4) समूहवाचक संज्ञा :

Þ   "जिन संज्ञा शब्दो से व्यक्ति अथवा वस्तु के समूह का बोध होता हो, उन्हे समूहवाचक संज्ञा कहते है ।"

उदाहरण –

  1. कुंभ का मेला विश्व मे प्रसिद्ध है ।
  2. भारतीय सेना ने आतंकवादियों को ढेर कर दिया ।
  3. भीड़ ने पुलिस पर पथ्थर फैंके ।
  4. मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित किया ।
  5. मनाहर पुस्तकालय गया है ।

उपर्युक्त उदाहरणो में रेखांकित शब्द मेला, सेना, भीड़, सभा, पुस्तकालय आदि शब्दो से हमें किसी व्यक्ति अथवा वस्तु के समूह का बोध होता है, जिसे समूहवाचक संज्ञा कहते है ।

  • अन्य समूहवाचक शब्द :
चाबी का गुच्छा, गुलदस्ता, सप्तर्षि, मंडल, वर्ग, परिवार, फौज़ ।

(5) द्रव्यवाचक संज्ञा :

 Þ  "जिस संज्ञा शब्द से नाप-तौलवाली वस्तुओ का बोध होता है, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है ।"

उदाहरण –

  1. सोना किमती धातु है ।
  2. लोहा लोहे को काटता है ।
  3. गुब्बारे में गैस भरी हुई है ।
  4. जय बाज़ार से सब्जि लाया ।
  5. मथुरा के पेड़े स्वादिष्ट होते हैं ।
  6. अनिल रोज़ दूध पीता है ।
  7. गाय का घी सेहत के लिए अच्छा होता है ।

उपर्युक्त उदाहरणो में रेखांकित शब्द सोना, लोहा, गैस, सब्जि, पेड़े, दूध, धी आदि से हमें ऐसी वस्तुओ का बोध होता है जिसका हम वज़न कर सके, ऐसे शब्दो का समावेश द्रव्यवाचक संज्ञा में होता है ।

  • अन्य द्रव्यवाचक शब्द :
चाँदी, मिट्टी, पेट्रोल, धन, तेल, गेहुँ, चावल आदी ।


ababababab



Comments

  1. बहुत ही अच्छा एवं ज्ञानवर्धक है।

    ReplyDelete
  2. Replies
    1. फूल जातिवाचक संज्ञा है । फूल कहने से हमे कई तरह के फूल का बोध होता है । और गूलाब का फूल कहने से केवल गुलाब के फूल का । गुलाब व्यक्तिवाचक संज्ञा है ।

      Delete
  3. Sir mujhe bhed ka meaning nhi pata chal rha

    ReplyDelete
  4. "गुलाब का फूल" , शब्द में कोनसी संज्ञा है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. गुलाब व्यक्तिवाचक संज्ञा है ।

      Delete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Visheshan or uske bhed | विशेषण और उसके भेद

varno ka vargikaran | वर्णो का वर्गीकरण